कहानी ६: नई आशा
प्रभु का वह भयावह दिन, जब परमेश्वर इसराइल और दुनिया के देशों का न्याय करने आएगा, इस कहानी का अंत नहीं है। जब प्रभु यीशु आएगा, वह अपने दुश्मनों पर पूरी जीत हासिल करेगा। मसीहा, वह धर्मी जन, यरूशलेम के सिंहासन को ले लेगा! वह अपने धर्मी सेवकों के साथ इस दुनिया के लोगों पर राज करने आएगा! यह परमेश्वर से प्यार करने वालों के लिए एक खुशी और शांति का समय होगा! प्रभु ने उसके बाद होने वाली घटनाओं की एक तस्वीर दी।देखिए, जकर्याह अपनी पुस्तक के चौदह अध्याय में क्या लिखता है:
तब जितने लोग यरूशलेम पर चढ़ने वाली सब जातियों में से बचे रहेंगे, वे प्रति वर्ष राजा को अर्थात सेनाओं के यहोवा को दण्डवत करने, और झोंपडिय़ों का पर्व मानने के लिये यरूशलेम को जाया करेंगे।
जकर्याह १४ः१६
वाह! परमप्रधान परमेश्वर आकर राजा के रूप में शासन करेगा!
सैकड़ों वर्ष के दौरान, यह अलग अलग भविष्यवाणियाँ इस्राएल के लोगों के लिए उनके अलग अलग भविष्यद्वक्ताओं के माध्यम से आई थी। यहूदी लोगों ने ध्यान से सभी भविष्यवाणियों को समझा कि वह किस प्रकार एक दुसरे से जुड़ी है। वे जानते थे कि प्रभु का एक दिन आ रहा है जब मसीहा इसराइल के राष्ट्र को साफ करेगा और दुष्ट को नष्ट करेगा। केवल कुछ धर्मी बचे रह जाएंगे। वे जानते थे कि मसीहा पूरे इस्रैल को इकट्ठा करके, राजा के रूप में देश पर शासन करेगा। वे जानते थे कि वह देशों का न्याय करेगा, और वह उन पर यरूशलेम से शासन करेगा। लेकिन वे यह नहीं जानते थे के यह सब कब होगा और किस प्रकार यह बातें आपस में जुड़ेंगी। और वह यह तो बिलकुल नहीं जानते थे कि यह दोनों, अभिषेक किया हुआ और खुद परमेश्वर, यरूशलेम पर कैसे राज्य करेंगे!
यीशु के समय तक, इसराइल के लोग मसीहा के आने के लिए सैकड़ों और सैकड़ों वर्ष इंतजार कर रहे थे। कैसी चाहत से वे प्रभु के महान दिन का और उसके राज्य का इंतजार कर रहे थे!
यीशु के समय में, इसराइल का राष्ट्र रोमी साम्राज्य के नीचे था। वे इससे क्या नफरत करते थे! रोम के लोग मूर्तियों की पूजा करते थे और बहुत दुष्टता भरे पाप करते थे। उनकी रहन सहन और आदते परमेश्वर के वचन और उसके व्यवस्था के बुल्कुल विपरीत था। जैसे जैसे यहूदी रोमन शासन के अत्याचारी अपमान के साथ रहते थे, वे मसीहा के आने और उसके राज्य की आशा से बंधे रहे। वे इस बात के सपने देखते थे कि कैसे मसीहा रोम के लोगों पर जीत पा कर, इसराइल को दुनिया में सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाएगा। वे बाइबल खोजते थे, यह जानने के लिए कि वह कब आ रहा है। वे व्यवस्था का पालन पूरी तरह करते ताकि वे अपने को उस धर्मी बचे कुचे झुण्ड में शामिल होने के लिए तैयार हो सके। उनके अगुओं ने परमेश्वर के नियम के आलावा भी कुछ नए नियम बनाए ताकि लोग परमेश्वर की व्यवस्था न तोड़े। वे अपने बुद्धिमान नए शिक्षकों और अगुओं को देखते कि कोई उन के बीच मसीहा तो नहीं है।
यहूदी यह नहीं समझ पाए कि जब मसीहा अपना महान और शक्तिशाली काम करने के लिए आएगा, तो वह इसे दो चरणों में करेगा। हम उसे मसीहा का पहला और दूसरा आगमन कहते हैं। दोनों चरण बहुत महत्वपूर्ण हैं, और प्रत्येक चरण अलग अलग भविष्यवाणीयों को पूरा करता है। पहली बार जब यीशु आया, तो वो शक्ति और बल से दुनिया के देशों का न्याय करने नहीं आया था। यह अपना सिंहासन लेने के लिए सही समय नहीं था। यह प्रभु का महान और भयानक दिन नहीं था। पहली बार जब यीशु आया, उसने कई भविष्यद्वाणीयां पूरी की, जैसे की यशैयाह की यह वाली:
प्रभु का आत्मा मुझ पर छाया रहता है, क्योंकि उसने मेरा अभिषेक किया है। उसने मुझे भेजा है कि मैं दरिद्रों को सुसमाचार सुनाऊँ, दुःखियों को ढारस बँधाऊँ; बन्दियों को छुटकारे का और कैदियों को मुक्ति का सन्देश सुनाऊँ; यशायाह ६१ः१
यशायाह ने यीशु के पहले आगमन के बारे में भी भविष्यवाणी की जब उसने एक पीड़ित सेवक के अद्भुत बलिदान के बारे में बात की थी। उसने लिखा;
हमारे पापों के कारण वह छेदित किया गया है। हमारे कूकर्मों के कारण वह कुचल दिया गया है। जो दण्ड वह भोगता था, उसके द्वारा हमें शान्ति मिली है और उसके घावों द्वारा हम भले-चंगे हो गये हैं। यशायाह ५३ः५
जब यहूदी लोगों ने यह विवरण पढ़ा कि एक आएगा और दुःख उठाएगा, उन्हें यह नहीं पता कि वह क्या सोचे। यह चित्र बाइबल का मसीहा पर उल्लेख से फरक लगता था- वह कि एक अभिषेक किया हुआ, मसीहा कुल जीत में आएगा। क्या यह पीड़ित सेवक वही था? निश्चित रूप से, वह महान राजा नहीं हो सकता है!
हम अब यह जानते हैं कि जब परमेश्वर ने मसीहा को पहली बार भेजा, उसका उद्देश्य यह नहीं था कि मसीहा दुनिया के देशों को जीत ले। इसके बजाय, यीशु अभी तक की सबसे अधिक बड़ी, गहरी, और अधिक महत्वपूर्ण जीत जीतने के लिए आया था। प्रभु यीशु ने पाप और मौत पर अपने आप को बलिदान करके विजय प्राप्त करी। अपने शुद्ध जीवन और बलि मौत से,मसीह ने पाप की ताकत और वह भयानक अभिशाप जो आदम और हव्वा दुनिया पर लाए, नष्ट कर दिया!
प्रभु यीशु मसीहा ने वैसे कार्य नहीं किया जैसे यहूदियों ने उम्मीद की थी। उसने एक सेना का निर्माण नहीं किया ना रोमनों से छुटकारा दिया। लेकिन परमेश्वर की आत्मा का अभिषेक उस पर था। उसने बीमार को भला चंगा करके, अंधों को आँखे दे के और लंगड़ों को ठीक करके, बंधुओं को मुक्त कर दिया। उसने गरीबों को शुभ समाचार सुनाया और इतने ज्ञान और समझ से सिखाया, कि उसने धार्मिक नेताओं का मुंह बंद कर दिया। इसराइल के सभी लोग जो परमेश्वर से प्यार करते थे, मसीह का काम देखकर जान सकते थे कि वह मसीहा ही था। लेकिन इसराइल में कई लोगों ने परमेश्वर के पुत्र को अपने अविश्वास और झूठे धर्म से अस्वीकार किया, जब वह उन के बीच में रहने आया।
एक दिन, प्रभु यीशु अपने दूसरे आगमन के लिए वापस आएगा। वह पराक्रम में आएगा और प्रभु के महान और भयानक दिन को लाएगा। वह उन अद्भुत और डरावनी भविष्यवाणियों को पूरा करेगा जो भविष्यद्वक्ताओं ने घोषित की थी। जैसा हम इतिहास में अपना समय देखते है, हम जान सकते हैं कि हम बीच के समय में रहते हैं। हम पीछे मसीह के पहले आगमन को देख सकते हैं, और हम उसके दूसरे आगमन के लिए आगे देखते है।
हमें यकीन है कि भविष्य में एक दिन, अभिषेक किया हुआ न्याय में आएगा और यरूशलेम में अपने राज्य की स्थापना करेगा। वह एक हजार साल के लिए दुनिया के सभी देशों पर राज करेगा! बाइबिल उस आश्चर्यजनक समय का वर्णन इस प्रकार करती है:
तब यिशै के ठूंठ में से एक डाली फूट निकलेगी और उसकी जड़ में से एक शाखा निकलकर फलवन्त होगी।
और यहोवा की आत्मा, बुद्धि और समझ की आत्मा, युक्ति और पराक्रम की आत्मा, और ज्ञान और यहोवा के भय की आत्मा उस पर ठहरी रहेगी।
ओर उसको यहोवा का भय सुगन्ध सा भाएगा।। वह मुंह देखा न्याय न करेगा और न अपके कानों के सुनने के अनुसार निर्णय करेगा;
परन्तु वह कंगालों का न्याय धर्म से, और पृथ्वी के नम्र लोगों का निर्णय खराई से करेगा; और वह पृथ्वी को अपने वचन के सोंटे से मारेगा, और अपने फूंक के झोंके से दुष्ट को मिटा डालेगा।
यशैयाह ११ः१-४
क्या आप कल्पना कर सकते है कि ऐसे अद्भुत और शक्तिशाली नेता के साथ जीवन कितना अलग होगा? यह ऐसा होगा जो दुनिया ने कभी नहीं देखी! और मसीह के विशेष शासनकाल के बाद, वह खुद अंतिम अंत को लाएगा। मौत खुद ही नाश हो जाएगी (यशैयाह 25:7), और मृत जीवित हो जाएंगे (यशैयाह 26:19) स्वर्ग और पृथ्वी, जैसे हम जानते हैं, चली जाएगी, और परमेश्वर एक नई स्वर्ग और एक नई पृथ्वी (यशैयाह 60:10, 65:17, 66:22) लाएगा। जिनको उसने अभिशाप से मुक्त किया है,वह हमेशा के लिए उसके राज्य में उसके साथ अनंतकाल के आनंद में रहेंगे! जैसे हम परमेश्वर के इस पराक्रमी काम के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं, हमारा काम है देखना, प्रार्थना करना और उसे अपने पूरे दिल और दिमाग से प्यार करना!